करवा चौथ की तैयारियों में जुटी सुहागिनें, मिल जुल कर का किया प्री-सेलिब्रेशन

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ग्वालियर. करवा चौथ की तैयारियों जुटी सुहागिनों ने दिन भर जम कर खरीदारी क। शाम को कला वीथिका में प्री-करवाचौथ सेलिब्रेशन में बॉलीवुड डांस के साथ अलग-अलग कॉम्पिटीशन में भाग लेकर अपना हुनर दिखाया। इस मौके पर ज्योतिर्विदों ने बताया कि करवा चौथ कैसे मनाया जाए। करवाचौथ के उत्साह में बीता दिन और सेलिब्रेशन में शाम ….

– शहर में करवा चौथ का उत्साह एक दिन पहले से ही सुहागिनों में नजर आया। शनिवार को दिन भर सजने संवरने की तैयारियों और शापिंग में बिजी रहीं, और शाम को प्री-फेस्टिवल सेलिब्रेशन में बॉलीवुड फिल्मों के डांस परफॉरमेंस और पूजा की थाली सजाने व मेहंदी रचाने के हुनर दिखा कर वाहवाही बटोरी।

– करवाचौथ को लेकर शनिवार को बाजारों में रौनक रही। महिलाओं ने शृंगार का सामान खरीदने के साथ पूजा की सामग्री खरीदी।महाराज बाड़ा, सराफा बाजार, टोपी बाजार में महिलाओं की भीड़ दिन भर बनी रही। बाजारों में भीड़ के कारण वाहन ही नहीं पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा था।

– थाली सजाओ में मेघना परमार, मेहंदी में रेखा अग्रवाल, डांस में ज्योति माहेश्वरी, चूड़ी में सरिता शर्मा, ड्रेसअप में सुजाता संग्राम सिंह और ज्वैलरी में वीणा प्रधान विजेता रहीं।
– जबकि वर्षा अग्रवाल के सिर पर बेस्ट करवा चौथ क्वीन का ताज रखा गया। इस मौके पर पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता को विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
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ये है करवा चौथ का मुहूर्त, ऐसे मनाएं
– करवाचौथ का व्रत 8 अक्टूबर को चंद्रोदय व्यापी चतुर्थी रविवार के दिन गजकेसरी योग में मनाया जाएगा। चंद्रदेव के दर्शन रात 8:12 बजे अमृत बेला में होंगे। वृषभ राशि के उदयकाल में चंद्रमा उच्च का रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पं.विजय भूषण वेदार्थी ने बताया कि ब्रजभूमि पंचांग के अनुसार ग्वालियर में रविवार चंद्रमा का उदय रात 8:12 बजे होगा। करवाचौथ की पूजा प्रदोष बेला, शुभ अमृत बेला शाम 5:51 बजे से प्रारंभ होकर चंद्रोदय तक रहेगी।

ऐसे करें करवाचौथ पूजन
– ज्योतिषाचार्य पं.आरएस वेदार्थी ने बताया, शाम को लकड़ी की पीढ़ी पर लाल वस्त्र बांधें। एक लोटे पर श्रीफल रखकर वरुण देवता की स्थापना करें और मिट्टी का करवा रखें। करवा में गेहूं, शक्कर और पैसे रखकर कालवा बांधें। इसके बाद गंध, अक्षत और पुष्प से पूजन करें। 13 बार करवा का टीका करें। 7 बार पीढ़ी के चारों ओर करवा घुमाएं।

– इस दिन श्रीगणेश, गौरी, महादेव, कार्तिकेय और वरुण देव का पूजन करें।
– हाथ में गेहूं के 13 दाने लेकर करवाचौथ की कहानी सुनें। करवा पर हाथ फेरकर सास-ससुर का आशीर्वाद जरूर लें। 13 दाने और करवा को यथास्थान रख दें। फिर रात्रि में उगते हुए चंद्र का दर्शन कर अर्ध्य दें, और पति के हाथों से व्रत खोलें। इस तरह चंद्र दर्शन के साथ करवाचौथ का व्रत संपन्न होता है।

करवा से ही सीता जी प्रकट हुई थीं
– करवा यानी घड़े से ही सीताजी का प्राकट्य हुआ था। सुहागिन स्त्रियों के लिए करवाचौथ का व्रत विशेष महत्व रखता है। यह चंद्र दर्शन के साथ सम्पन्न होता है। माता जानकी का जन्म भी पृथ्वी की कोख से हुआ था। वे भगवान श्रीराम की धर्मपत्नी बनीं। इसी कारण करवा का महत्व है।

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